बुधवार, 30 सितंबर 2009
मंगलवार, 29 सितंबर 2009
गोमती नगर पूजा पंडाल में भरी भीड़ (gomti nagar puja pandla me bhare bhid)
शारदीय नवरात्र की महा अष्टमी शनिवार को दुर्गा पूजा पण्डालों में जन सैलाब उमड़ पड़ा। दर्शन-पूजन के लिए भारी कतार लगी। लोगों को कई घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ी। विभिन्न पण्डालों में वितरित किये जा रहे महा प्रसाद को लेने के लिए धक्का-मुक्की देर रात तक होती रही। तमाम वे लोग व्रत भी रहे जो चढ़ती-उतरती नवरात्र रहते है। पूरे नवरात्र पर्यन्त व्रत रहने वाले नवमी के दिन हवन कराने के व्यवस्था में लगे रहे। शक्ति पीठ शीतला चौकिया धाम एवं मैहर मंदिर में भी दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। हालांकि महंगाई का भी असर दिखाई पड़ रहा था। शहर के एक कोने में स्थापित पण्डाल से दूसरे कोने में जाने के लिए लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। कारण कि सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पुलिस ने रिक्शा तथा वाहनों के प्रचलन पर रोक लगा दी है। एक से बढ़कर एक आकर्षक पूजा पण्डाल सजाए गये है। इनको देखते ही बनता है। मार्ग सजावट ऐसी की गयी है मानो देव लोक से परियों का आगमन होने वाला है और उनके स्वागत में यह भव्य सजावट की गयी है।
विराम खंड दशहरा पूजा (viram khand dashahara puja)
शुक्रवार, 25 सितंबर 2009
कॉपीराइट आवेदन अब ऑनलाइन
कॉपीराइट के लिए अब अब ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने पोर्टल का उद्घाटन किया। इसकी साइट http://copyright.gov.in/ पर कॉपीराइट साइट में दायर मामलों और उन पर सुनवाई की तारीख के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
गुरुवार, 24 सितंबर 2009
जय माता दी
जय माता दी जय माता दी जय माता दी
- माता के नौ रूप
शैलपुत्री
देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है।नाम से जानी
ब्रह्मचारिणी
नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।
चंद्रघंटा
माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है।
कूष्माण्डा
नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘अदाहत’ चक्र में अवस्थित होता है।
स्कंदमाता
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।
कात्यायनी
माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा’ चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
कालरात्रि
माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।
महागौरी
माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं।
सिद्धिदात्री
माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।
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